चेन्नईः सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने गुरुवार को अपने मंत्रिमंडल का पहला बड़ा विस्तार करते हुए 23 नए मंत्रियों को शामिल किया। इस विस्तार को नवगठित सरकार के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने, विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में रिक्त पदों को भरने और गठबंधन सहयोगियों को प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में गठबंधन दलों के कई वरिष्ठ नेता और विधायक भी उपस्थित रहे। इनमें थोल. थिरुमावलवन सहित अन्य सहयोगी दलों के प्रमुख नेता शामिल थे।
हाल ही में संपन्न तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) 108 सीटें जीतकर राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि पार्टी अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी थी, जिसके बाद उसने गठबंधन दलों और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई।
मुख्यमंत्री विजय ने 10 मई को नौ मंत्रियों के साथ सरकार का गठन किया था। उस समय एन. आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. के.जी. अरुणराज, के.ए. सेंगोत्तैयान, पी. वेंकटरमणन, आर. निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टी.के. प्रभु और एस. कीर्तना को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। इसके बाद 16 मई को विभागों का आवंटन किया गया, लेकिन वन, कृषि, राजस्व, आवास, सहकारिता और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग बिना मंत्री के रह गए थे। इसी कारण मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं लगातार जताई जा रही थीं।
गुरुवार को हुए विस्तार में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया। नए मंत्रियों में श्रीनाथ (थूथुकुडी), कमाली एस (अविनाशी), सी. विजयलक्ष्मी (कुमारपालयम), आर.वी. रंजीतकुमार (कांचीपुरम), विनोद (कुंभकोणम), राजीव (तिरुवदनाई), बी. राजकुमार (कुड्डालोर), वी. गांधीराज (अरक्कोणम), मथन राजा पी (ओट्टापिडारम), जगदेश्वरी के (राजपालयम), एम. विजय बालाजी (इरोड पूर्व), लोगेश तमिलसेल्वन डी (रासीपुरम), विजय तमिलन पार्थिबन ए (सेलम दक्षिण), रमेश (श्रीरंगम), कुमार आर (वेलाचेरी), थेन्नारासु के (श्रीपेरुम्बुदूर), वी. संपत कुमार (कोयंबटूर उत्तर), मोहम्मद फरवास जे (अरंथांगी), डी. सरथकुमार (तांबरम), एन. मैरी विल्सन (डॉ. राधाकृष्णन नगर) और विग्नेश के (किनाथुकडावु) शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त कांग्रेस पार्टी के दो विधायकों — राजेश कुमार एस (किल्लियूर) और केपी विश्वनाथन (मेलूर) — को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इसके साथ ही कई दशकों बाद तमिलनाडु मंत्रिमंडल में कांग्रेस की वापसी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम गठबंधन राजनीति को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर सहयोगी दलों को संतुष्ट रखने की रणनीति का हिस्सा है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, विजय सरकार का यह विस्तार प्रशासनिक कार्यक्षमता को बढ़ाने में मदद करेगा। खासकर कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग और राजस्व जैसे विभागों में नए मंत्रियों की नियुक्ति से नीतिगत फैसलों और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है।
नई सरकार के गठन के बाद यह पहला बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि मुख्यमंत्री विजय अपनी सरकार को अधिक व्यापक और संतुलित स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व बढ़ाने और गठबंधन सहयोगियों को पर्याप्त हिस्सेदारी देने से सरकार की स्थिरता और राजनीतिक पकड़ मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि आने वाले महीनों में मंत्रियों के विभागों के अंतिम आवंटन और सरकार की प्राथमिकताओं से यह स्पष्ट होगा कि विजय सरकार राज्य में किस प्रकार का प्रशासनिक और विकास मॉडल लागू करना चाहती है।
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